Thursday, May 03, 2007

हाल क्या है आपका

मेरे दोस्त हमेशा पूछते हैं "क्या हाल है?"

हमारा जबाब हमेशा एक होता रहा है "अरे कुछ खास नहीं"

फिर भी कुछ तो बताओ ... नया पुराना ...कुछ भी ...

उनके लिए खास ...


अरे कुछ खास नहीं है
लाइफ में सब वैसा ही है
कुछ नया नहीं है
वही चीनी कम पानी ज्यादा वाली चाय
वही अखबार और वही खबर बार बार
आज सौ मरे एक दुर्घटना में , बहु को जिंदा जला दिया परिवार वालों ने
आज बैंगलोर में मूसल्धार बारिश हुई , और राजस्थान
में दो लोग प्यासे मरे
आन्ध्रा में अकाल है, और बिहार में सौ बाढ में मरे

आज किसी की शादी है, कल उसका दिवोर्स होने वाला है
मुहल्ले में आज कल कुत्ते रात में बहुत भौंकते है ,
और पॉवर कट ने ले ली है जान , रात की तनहाई में मच्छरों का साथ है

कल शर्माजी की बेटी वर्मा साहेब के लङके के साथ भाग गयी
आज परोस में मेहता साहब के माँ की बरसी है
राव जी की बीबी का लफ़ङा प़साद के छोरे के साथ है
राठोङ जी का उनकी नौकरानी के साथ चक्कर है


आस्ट्रेलिया ने वर्ल्ड कप जीत लिया है
इंडिया बुरी तरीके से बंगलादेश से हारी है

उसका गम अभी तक भरी है
इधर नडाल ने मचायी धूम है , फेडरर का बुरा हाल है

अभी भी अमेरिका की दादागिरी है
इंडिया में बहुत सारी विकास बाकी है
होम लोन अब बहुत मंहगी है
घर लेना भी अब एक समस्या भारी है

चाय भी ठण्डी हो गयी है, खबर भी अब बासी हो गयी है
हाल अब भी बेहाल है , फिर भी जिन्दगी खुशहाल है


क्या नाम दूं

उस हवा को क्या नाम दूं
जो तेरी गलियों से आती हैं
और खुशबु तेरी लाती है
आने का अपना मकसद बस
दिल का पैगाम बताती है
उस हवा को क्या नाम दूं

उस फिजा को क्या नाम दूं
जहाँ महक तुम्हारे आँचल की
मुझको मदहोश बनाती है
जहाँ सब कलियाँ अपने अन्दर
सूरत तेरी दिखलाती हैं
उस फिजा को क्या नाम दूं

उस राह को क्या नाम दूं
जो तेरे घर से निकलती है
और मेरे घर को आती है
जो दूरी का एहसास मिटा के
तुझे पास मेरे ले आती है
उस राह को क्या नाम दूं

इस रिश्ते को क्या नाम दूं
कि जिसमें बंध कर हम दोनो
हर सुख दुःख को संग सहते हैं
कहने को हैं दो जिस्म मगर
इक जान कि तरह हम रहते हैं
इस रिश्ते को क्या नाम दूं

Wednesday, May 02, 2007

झूम बराबर झूम

आज मैं झूमना चाहता हूँ
लेके हाथ तेरा अपने हाथों मैं
बहुत दूर तक जाना चाहता हूँ
आज मैं झूमना चाहता हूँ .....

आज मैं झूमना चाहता हूँ
तेरे आँखों के प्याले से मय को
छू कर अपने होंठों से
नशे में डूबना चहता हूँ
आज मैं झूमना चाहता हूँ .....

आज मैं झूमना चाहता हूँ
तेरी खुशबू को सांसो में बसा के
मदहोश होना चहता हूँ
आज मैं झूमना चाहता हूँ .....

आज मैं झूमना चाहता हूँ
उनकी बाँहों में रख के सर
आज मैं दुनिया को अलविदा कहना चहता हूँ
आज मैं झूमना चाहता हूँ .....

आज मैं झूमना चाहता हूँ
बस झूमना चहता हूँ ...
हो के मदहोश बस
तेरी ताल पे थिरकना चहता हूँ
तेरे सुर को लेके होंठों पे
मैं आज गुनगुना चहता हूँ
फिर बनाके तुम्हे अपना
दुनिया को बेगाना करना चहता हूँ
आज मैं झूमना चाहता हूँ .....


PS: inspired by deepak creation .." aaj main gungunana chata hoon".