Sunday, June 24, 2007

एक अजनबी जो मुझे प्यारा है

मीला कल एक अजनबी से
जो लगा दिल को अपना सा

उसका चेहरा था एक महताब
जिस्में जला मेरा वजूद सारा

उनके आंखों में डूब के
भूला दिया गम जीवन भर का

की बातें चंद, थी मुलाकात दो घङी की
फिर भी लगा की है बन्धन अपना सदियों का

ना जाने क्यों है हर पल ख़याल उनका
जानता हूँ वो था ख्वाब पल दो पल का

अब तो बस गए हैं वो ख्यालों में
बस आस है पल पल उनके आने का

अब सुकून नहीं आयेगा दिल को उनसे मिले बिना
लेकिन उन्हें बुलाये भी तो देके वास्ता कीस रिश्ते का

था वो अजनबी मगर लगा दिल को प्यारा
पहले था बेगाना सा, लेकिन अब लगे अपना सा

2 comments:

bkbhav said...

बल्ला बल्हा,,,,ये मेरे सर जी को अचानक कौन मिल गयी.....

Anonymous said...

https://www.blogger.com/comment.g?blogID=33949489&postID=3023004897085870788&bpli=1