आज मैं गुनगुनाना चाहता हूँ
पकड़ के आसमान की बांहों को
हवा में झूल जाना चाहता हूँ
आज मैं गुनगुनाना चाहता हूँ
अब तो मस्ती ही मस्ती छायी है
तेरी नज़रों में, मेरी नज़रों में
इश्क का प्याला तेरी निगाहों से
पी के मैं झूम जाना चाहता हूँ
आज मैं गुनगुनाना चाहता हूँ
ख़्वाब देखे थे जो, हुये पूरे
अब नयी मंजिल की मैं तलाश में हूँ
तेरे क़दमों से मिला के अपने कदम
मैं बहुत दूर जाना चाहता हूँ
आज मैं गुनगुनाना चाहता हूँ
जब भी सोचा है, तुम्हें सोचा है
जब भी चाहा है, तुम्हें चाहा है
बसा के आंखों में तेरा चेहरा
मैं सब कुछ भूल जाना चाहता हूँ...
आज मैं गुनगुनाना चाहता हूँ
तेरी खुशबू से महक रही है फिजा
तेरी आहट से महक उठता हूँ मैं
डूब कर मैं तेरी मोहब्बत में
तेरे संग जीना-मरना चाहता हूँ
आज मैं गुनगुनाना चाहता हूँ
पकड़ के आसमान की बांहों को
हवा में झूल जाना चाहता हूँ
आज मैं गुनगुनाना चाहता हूँ
Thursday, April 19, 2007
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
2 comments:
well, nicely written lines.. but tell me who is that muse?
Hui aksho main doobi mere ishq ki kahani,
socha tha likhunga main bhi apani jindgani,
koshishe ki samaya ki ret par likhane ki,
par har lahar se pahle khud hi unhe mita di.
kya baat hai ... nice one ...
marvelllous piece ...
aaj gunagune ki chahat humain bhi hai
lekin sath ek saaj chaiye
aur unke honthon se nikali har baat chaiye
Post a Comment