इस शाम की क्या बात है
जब भी आयी तेरी याद ले आयी
इन आंखों को नम कर के
तुझे और मेरे करीब ले आयी
तेरे हसीं चेहरे का दीदार करा
इस दर्द-ए-दिल को दवा दे गयी
कभी इस बात को कभी उस बात को
कभी इस दास्ताँ को कभी उस दास्ताँ को
यद्दों में मेरे ले आयी
तेरी खुली रेशमी जुल्फों को
मेरे आगोश में ले आयी
अदाएं तेरी, शर्म-ओ-हया तेरी
मेरे अरमानों को जाम दे आयी
मेरा उनके सामने हो जाना बेबाक
मेरी बेचैनयों को और हवा दे गयी
और जाते हुए यही शाम
उनका पैगाम दिल को दे गयी
इस शाम की क्या बात है ....
Thursday, April 19, 2007
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2 comments:
wah suman jee wah........
"is shaam ki subah nahin.........."
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