दिल का तराना
खुशियों का खजाना लेके
मस्ती भरा तराना लेके
मौसम बड़ा सुहाना लेके
जिन्दगी आ रहा हूँ मैं......दिल-नशीं आ रहा हूँ मैं
तेरे चेहरे को दिल में बसा के
तुझको अपना खुदा बना के
तेरे होंठों से गीत चुरा के
दिलरुबा गा रहा हूँ मैं.........हम-नशीं आ रहा हूँ मैं
अपने मिलन की प्यास बुझाने
फासलों का एहसास मिटाने
तुझको अपने संग ले जाने
हाँ रे हाँ, आ रहा हूँ मैं.........माह-जबीं आ रहा हूँ मैं
सारी खुशियाँ तुझ पे लुटाने
जीवन तेरे संग बिताने
तुझको अपनी दुल्हन बनाने
मेरी जान, आ रहा हूँ मैं............मेरी जान आ रहा हूँ मैं
2 comments:
Wah... kya baat hai janaab maan gaye :)
sahi ayee ho ...
i feel i am going to meet someone ...after reading ur poem ...
well written one ...
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