बेताबी
उनके आने की आहट पाते ही
हो जाती है इस दिल में बेचैनी ...
देखनो को उनको तरसती है निगाहें
क्यों फिर कतराती हैं देख के उनको ये निगाहें ...
सोचती है हर वक़्त उनको
क्यों फिर नहीं रहता ख्याल किसी बात का उनके सामने
महकती है खुशबू उनकी हर वक़्त
क्यों फिर सांस लेने की फुर्सत नहीं है उनके सामने
हर वक़्त कहती है की ना रह पाऊँगा बिन उनके
क्यों फिर बेजबान हैं मेरी बातें उनके सामने
2 comments:
wah wah.............suman jee dil ko pighla ke rakh diya aapne.........
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